नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से पिछले कुछ महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफे ने संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। बताया जा रहा है कि नौकरी छोड़ने वाले कई वैज्ञानिक गगनयान, चंद्रयान-3 और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े रहे हैं। लगातार बढ़ते इस्तीफों के बीच अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) ने वैज्ञानिकों के इस्तीफों और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए उन्हें और सख्त बना दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के महीनों में 100 से 120 वैज्ञानिकों ने ISRO से इस्तीफा दिया है। इनमें सबसे अधिक वैज्ञानिक यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) से हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, URSC से करीब 80 और VSSC से लगभग 20 वैज्ञानिक संगठन छोड़ चुके हैं, जबकि कुछ इस्तीफे अभी मंजूरी की प्रक्रिया में हैं।
जानकारी के अनुसार, इस्तीफा देने वाले अधिकांश वैज्ञानिक अब निजी अंतरिक्ष कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कई ऐसे वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने ISRO के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई थीं।
इस्तीफा देने वालों में एलवीएम-3 (LVM-3) रॉकेट परियोजना के पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ, SpaDeX मिशन के एक प्रोजेक्ट डायरेक्टर और चंद्रयान-3 मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर (सिमुलेशन) आदित्य रालापल्ली का नाम भी शामिल है। आदित्य की टीम ने चंद्रयान-3 की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए एक लाख से अधिक सिमुलेशन परीक्षण किए थे।
वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफों को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नया आंतरिक आदेश जारी किया है। नए आदेश के तहत गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व के मिशनों से जुड़े ग्रुप ‘A’ वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे अब संबंधित केंद्रों के निदेशक सीधे मंजूर नहीं कर सकेंगे। ऐसे सभी मामलों को अंतिम स्वीकृति के लिए अंतरिक्ष विभाग (DoS) के पास भेजा जाएगा।
ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए कहा कि किसी भी बड़े संस्थान में कर्मचारियों का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि नए नियमों का मकसद किसी को रोकना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण मिशनों पर किसी तरह का अचानक असर न पड़े। जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारियां दूसरे अधिकारियों को सौंप दी जाएंगी।
फिलहाल ISRO में 14,600 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। हालांकि इस्तीफा देने वाले वैज्ञानिकों की संख्या कुल कर्मचारियों के मुकाबले कम है, लेकिन इनमें कई अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनका देश के प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों में अहम योगदान रहा है। ISRO की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, संगठन में 1,050 वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है, लेकिन अनुभवी वैज्ञानिकों की कमी को तुरंत पूरा करना आसान नहीं माना जा रहा है।