चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने Rajpal Yadav को सरेंडर करने का दिया आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक संबंधित जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद भुगतान न करना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।
यह मामला दिल्ली की कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसने राजपाल यादव की कंपनी को फिल्म निर्माण के लिए रकम दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चेक बाउंस जैसे मामलों में भुगतान को लेकर अदालत को दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन करना गंभीर विषय है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजपाल यादव को कई अवसर दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने कोर्ट का भरोसा तोड़ा।
दरअसल, पूरा मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘अता-पता लापता’ बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। फिल्म आर्थिक रूप से सफल नहीं हो पाई। इसके बाद कर्ज की रकम लौटाने में लगातार देरी होती गई।
शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि रकम चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद राजपाल यादव और उनसे जुड़ी कंपनी के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत केस दर्ज कराया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को कई बार नोटिस भेजे, लेकिन वे लंबे समय तक अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके बाद साल 2013 में उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वे 3 से 6 दिसंबर 2013 तक चार दिन जेल में रहे। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उनकी अपील पर सजा निलंबित कर दी थी।
इसके बाद, निचली अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी। जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए सजा पर अस्थायी रोक लगा दी कि अभिनेता कोई आदतन अपराधी नहीं हैं और उनके मामले में सुधार और समाधान की गुंजाइश है। इसी आधार पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने की सलाह दी और केस को मेडिएशन सेंटर भेज दिया।
मध्यस्थता के दौरान राजपाल यादव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे शिकायतकर्ता कंपनी को कुल 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान करेंगे। इसमें 40 लाख रुपए की पहली किश्त और 2.10 करोड़ रुपए की दूसरी किश्त शामिल थी। लेकिन अदालत के अनुसार, तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद एक भी किश्त जमा नहीं की गई।
इस पर अभिनेता की ओर से यह तर्क दिया गया कि ड्राफ्ट में टाइपिंग की गलती हो गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि गलती की जानकारी होने के बावजूद न तो रकम जमा की गई और न ही कोई औपचारिक स्पष्टीकरण दिया गया।
जनवरी 2026 में कोर्ट ने राजपाल यादव को अंतिम मौका दिया था, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन बेहद गंभीर है। कोर्ट ने कहा कि अभिनेता को कई अवसर दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने अदालत के भरोसे को तोड़ा है।
कोर्ट ने राजपाल यादव को 4 फरवरी को दोपहर 4 बजे तक आत्मसमर्पण करने की मोहलत दी है। यह राहत उनके वकील के अनुरोध पर दी गई, जिन्होंने बताया कि अभिनेता मुंबई में पेशेवर काम में व्यस्त हैं। साथ ही अदालत ने पहले से जमा रकम शिकायतकर्ता कंपनी को जारी करने का आदेश भी दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी, जिसमें जेल अधीक्षक से अनुपालन रिपोर्ट मांगी जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *