चंडीगढ़। पंजाब में अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसके साथ ही राज्यभर में मतदाताओं तक पहुंचने के लिए ऑटोमेटेड (आईवीआर) राजनीतिक सर्वे कॉल्स का सिलसिला भी बढ़ गया है। कई लोगों का कहना है कि उन्हें रोजाना कई बार ऐसी रिकॉर्डेड कॉल्स प्राप्त हो रही हैं, जिनमें उनकी राजनीतिक पसंद और संभावित मतदान को लेकर सवाल पूछे जाते हैं। इन कॉल्स में लोगों से यह जानने की कोशिश की जाती है कि अगर वर्तमान समय में चुनाव हों तो वे किस राजनीतिक दल को समर्थन देंगे। इसके लिए अलग-अलग पार्टियों के नाम के साथ अलग-अलग नंबर दबाने का विकल्प भी दिया जाता है, जिससे मतदाताओं की राय जुटाई जा सके।
हालांकि चुनावी मौसम में इस तरह के सर्वेक्षण आम माने जाते हैं, लेकिन इस बार चुनावों से काफी पहले ही इन कॉल्स की संख्या बढ़ने से लोग असुविधा महसूस कर रहे हैं। कई नागरिकों का कहना है कि दिन में दो से तीन बार आने वाली कॉल्स के कारण मोबाइल फोन का सामान्य इस्तेमाल भी प्रभावित हो रहा है। बठिंडा की एक महिला ने बताया कि चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक सर्वे कॉल्स की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। वहीं, कई युवाओं और किसानों ने भी कहा कि लगातार आने वाली इन कॉल्स से लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।
राजनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक, इस तरह की आईवीआर कॉल्स का इस्तेमाल राजनीतिक दलों और चुनावी रणनीति तैयार करने वाली एजेंसियों द्वारा जनता की राय और विभिन्न क्षेत्रों के मुद्दों को समझने के लिए किया जाता है। इन सर्वेक्षणों के आधार पर मतदाताओं की पसंद और संभावित उम्मीदवारों की लोकप्रियता का आकलन कर चुनावी रणनीति बनाई जाती है। हालांकि, लगातार बढ़ रही इन राजनीतिक सर्वे कॉल्स को लेकर लोगों में नाराजगी भी बढ़ने लगी है। कई लोगों का मानना है कि ऐसी कॉल्स की संख्या को सीमित किया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।