पंजाब चुनाव की हलचल तेज़: जिला परिषद और पंचायत समिति पर आई बड़ी अपडेट

पंजाब में लंबे समय से लंबित पड़े जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को लेकर जल्द बड़ी घोषणा होने की संभावना है।

पंजाब में लंबे समय से लंबित पड़े जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को लेकर जल्द बड़ी घोषणा होने की संभावना है। निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों के अनुसार, राज्य चुनाव आयोग अब किसी भी समय चुनाव कार्यक्रम जारी कर सकता है। माना जा रहा है कि मतदान दिसंबर के दूसरे सप्ताह में कराया जा सकता है। इस चुनावी प्रक्रिया में करीब 1.35 करोड़ मतदाता मतदान कर सकेंगे।
राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी ने संकेत दिया है कि आयोग पूरी तरह तैयार है और औपचारिक घोषणा का इंतज़ार है। सरकार पहले ही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को भरोसा दे चुकी है कि 5 दिसंबर से पहले चुनाव कराए जाएंगे।
25 नवंबर के बाद हो सकती है घोषणा
सूत्रों के मुताबिक राज्य चुनाव आयोग 25 नवंबर के बाद किसी भी दिन चुनावों की तारीखों का ऐलान कर सकता है। चर्चाओं के अनुसार, मतदान 14 दिसंबर को आयोजित किए जाने की संभावना ज्यादा है, क्योंकि उस दिन रविवार भी है, जिससे प्रशासनिक प्रबंधन आसान हो जाएगा। रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायत विभाग ने हाई कोर्ट में दायर हलफनामे में आश्वासन दिया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
जिलेवार नोटिफिकेशन जारी
गुरु तेग बहादुर जी के 350वें प्रकाश पर्व से जुड़े कार्यक्रम पूरे होते ही चुनावी प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है। विभाग ने जिला परिषद और पंचायत समितियों के पुनर्गठन का काम पूरा कर लिया है।
डिप्टी कमिश्नरों द्वारा तैयार प्रस्तावों के आधार पर जोन और आरक्षण सूची तैयार की जा चुकी है और कई जिलों में इस संबंध में सरकारी नोटिफिकेशन भी जारी हो चुके हैं।
कई बार टली चुनाव प्रक्रिया, अब अंतिम चरण में तैयारी
पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने पहले हलफनामे में 31 मई तक चुनाव कराने की बात कही थी। लेकिन ब्लॉकों के पुनर्गठन में देरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते समयसीमा आगे बढ़ती गई। इसके बाद सरकार ने अदालत से तीन महीने का अतिरिक्त समय माँगा और 5 अक्टूबर तक चुनाव कराने का वादा किया।
इसी दौरान पंजाब में आई बाढ़ के चलते व्यवस्थाओं पर असर पड़ा, जिसके कारण विभाग ने एक बार फिर नई समयसीमा 5 दिसंबर तक की मांग की। अब जब सारी तैयारियाँ पूरी बताई जा रही हैं, तो चुनाव कार्यक्रम का ऐलान बस औपचारिकता भर माना जा रहा है।

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