लुधियाना: जब इरादे मजबूत हों तो मुश्किल हालात भी रास्ता नहीं रोक पाते। लुधियाना के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी अश्वनी साहोता और उनकी पत्नी शबाना इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। व्हीलचेयर पर खेलते हुए दोनों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते हैं और अब उनका अगला लक्ष्य भारत के लिए पैरालंपिक में खेलना है।
अश्वनी और शबाना का सफर चुनौतियों से भरा रहा। महंगी स्पोर्ट्स व्हीलचेयर खरीदने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण उन्होंने वर्षों तक सामान्य बास्केटबॉल व्हीलचेयर पर ही अभ्यास किया और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रदर्शन से लगातार पहचान बनाई।
दोनों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक जीते हैं, जबकि शबाना ने वर्ष 2022 में युगांडा व्हीलचेयर पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल में दो रजत पदक हासिल किए। हाल ही में मिस्र में आयोजित पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने बहरीन में होने वाली पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप के लिए भी जगह बनाई।
शबाना ने इस उपलब्धि का श्रेय जिला प्रशासन और समाज से मिले सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की आर्थिक मदद से उन्हें मिस्र में खेलने का अवसर मिला। वहीं SGPC, यूनाइटेड सिख्स और अन्य संस्थाओं ने भी यात्रा, उपकरण और अन्य आवश्यक खर्चों में सहयोग किया।
हालांकि दोनों खिलाड़ियों का कहना है कि पैरालंपिक तक पहुंचने का सफर अभी लंबा है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट, आधुनिक स्पोर्ट्स व्हीलचेयर, बेहतर कोचिंग और नियमित प्रशिक्षण के लिए लगातार आर्थिक सहायता की जरूरत है। उन्होंने उद्योग जगत, सामाजिक संस्थाओं और खेल प्रेमियों से आगे आकर पैरा खिलाड़ियों का समर्थन करने की अपील की है।
अश्वनी का कहना है कि खेल और जिंदगी दोनों में वे एक-दूसरे की ताकत हैं। वहीं शबाना का मानना है कि मेडल के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और त्याग छिपा होता है, जिसे बहुत कम लोग देख पाते हैं।
दंपती ने प्रशासन से शास्त्री हॉल के खराब हो चुके लकड़ी के बैडमिंटन कोर्ट की मरम्मत, व्हीलचेयर खिलाड़ियों के लिए सुलभ शौचालय और एक योग्य पैरा बैडमिंटन कोच की नियुक्ति की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो देश में कई और दिव्यांग खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।