Kangana Ranaut का पासपोर्ट होगा जब्त? आज Bathinda Court में पेशी, आ सकता है बड़ा फैसला

सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री Kangana Ranaut आज स्पेशल कोर्ट में पेश होंगी।

बठिंडा में चल रहे मानहानि मामले में सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत आज स्पेशल कोर्ट में पेश होंगी। यह पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। पिछली सुनवाई में अदालत ने उन्हें ऑनलाइन पेश होने की अनुमति दी थी, जिसे आज भी जारी रखा गया है। इससे पहले भी कंगना इसी तरीके से कोर्ट के सामने उपस्थित हो चुकी हैं।
पासपोर्ट ज़ब्ती मामले पर भी नजर
मानहानि केस के साथ-साथ, आज अदालत पासपोर्ट ज़ब्ती से जुड़े एक अन्य मामले पर भी अपना निर्णय सुना सकती है। यह मामला वर्ष 2020–21 में दिल्ली में हुए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के दौरान शुरू हुआ था। इस संबंध में बहादुरगढ़ जड़िया गांव (बठिंडा) की रहने वाली महिंदर कौर ने अदालत में याचिका दायर की थी।
किसान आंदोलन के दौरान कंगना रनौत द्वारा किए गए एक ट्वीट ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने यह टिप्पणी की थी कि महिलाएं 100 रुपये लेकर किसान आंदोलन में शामिल होती हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक बुजुर्ग महिला की तस्वीर पर टिप्पणी करते हुए उनका मज़ाक उड़ाया था।
कंगना ने अपने पोस्ट में लिखा था कि यही वह महिला हैं जिन्हें टाइम मैगज़ीन में भारत की शक्तिशाली महिलाओं में शामिल बताया गया था और जो कथित तौर पर 100 रुपये में उपलब्ध हैं। इस टिप्पणी को लेकर देशभर में विरोध हुआ था।
2021 में दर्ज हुआ मानहानि केस
इस ट्वीट के बाद 4 जनवरी 2021 को 81 वर्षीय महिंदर कौर ने बठिंडा कोर्ट में कंगना के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज करवाई। मामले की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली, जिसके बाद कोर्ट ने कंगना रनौत को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
समन के बाद कंगना रनौत ने राहत के लिए पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की, जहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
पीड़िता की प्रतिक्रिया
मामला सामने आने के बाद महिंदर कौर ने एक टीवी इंटरव्यू में कंगना की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि कंगना को खेती और किसानों की मेहनत की कोई समझ नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि वह अपने खेतों का काम छोड़कर 100 रुपये के लिए आंदोलन में क्यों शामिल होंगी।

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