Sukhbir Badal का नजदीकी Satinder Singh Kohli अरेस्ट, गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़ा मामला, सियासत गरमाई

विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने गुरुवार को कहा कि पुलिस जांच एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की जा रही है.

पंजाब पुलिस ने गुरु ग्रंथ साहिब की 328 गुमशुदा पवित्र प्रतियों के मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) सतिंदर सिंह कोहली को गिरफ्तार किया है. जिसके बाद कोर्ट ने कोहली को 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. अधिकारियों ने बताया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सीए के रूप में कार्यरत कोहली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया. कोहली को पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का बेहद करीबी माना जाता हैं.

बता दें कि अमृतसर में एसजीपीसी के पूर्व मुख्य सचिव और सीए समेत 16 लोगों के खिलाफ 2020 में प्रतियों के लापता होने के संबंध में सात दिसंबर 2025 को मामला दर्ज किए जाने के लगभग तीन हफ्ते बाद यह पहली गिरफ्तारी की गई है.

क्या है पूरा मामला?

अमृतसर में एसजीपीसी के प्रकाशन केंद्र से स्वरूपों के गायब होने का मामला जून 2020 में सामने आया, जिससे उस समय एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. पिछले साल 29 दिसंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि लापता प्रतियों को खोजने के लिए सिख संगठनों द्वारा गहन जांच की मांग के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

सिख संगत के लिए बड़ी उपलब्धि

कोहली की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए, आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब इकाई के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने गुरुवार को कहा कि पुलिस जांच एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की जा रही है. धलीवाल ने कहा, आज सिख संगत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिसका वे पिछले चार से पांच वर्षों से इंतजार कर रहे थे.

मान सरकार पर राजनीति करने का आरोप

आप के नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि 328 पवित्र स्वरूपों के गायब होने से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जांच शुरू की गई थी. इसी बीच, एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने इस मुद्दे पर आप सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया.

सिख भावनाओं के साथ खिलवाड़

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोहरी नीति अपना रही है और सिख भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है. धामी ने एक बयान में कहा कि मान सरकार के कार्यकाल के दौरान धर्म के अपमान की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन इन गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए एसजीपीसी के प्रशासनिक मामलों में जानबूझकर हस्तक्षेप किया जा रहा है.

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