Oman में फंसी 70 भारतीय महिलाएं, Sant Seechewal ने की सरकार से अपील

संत सीचेवाल ने खाड़ी देशों में रोजगार के नाम पर भारतीय महिलाओं को फंसाने वाले ट्रैवल एजैंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की है।

ओमान की राजधानी मस्कट में पिछले कई वर्षों से फंसी लगभग 70 भारतीय महिलाओं की सुरक्षित स्वदेश वापसी को लेकर राज्यसभा सांसद एवं पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर भारत सरकार के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने इन पीड़ित महिलाओं की शीघ्र भारत वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है।
संत सीचेवाल ने खाड़ी देशों में रोजगार के नाम पर भारतीय महिलाओं को फंसाने वाले ट्रैवल एजैंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों से संबंधित इन महिलाओं को बेहतर रोजगार के झूठे वायदों के आधार पर ओमान ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि ओमान पहुंचने के बाद इन महिलाओं को गंभीर मानसिक और शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा। इनमें से कई महिलाएं गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं और कई वर्षों से भारत लौटने की प्रतीक्षा कर रही हैं। ट्रैवल एजैंटों द्वारा इन्हें 20,000 से 50,000 प्रतिमाह वेतन का लालच दिया गया था, लेकिन मस्कट पहुंचते ही इनके साथ अमानवीय व्यवहार किया।
ओमान से भारत लौट चुकी रानी शक्ति सिंह ने मस्कट में पीड़ित महिलाओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी। उन्होंने राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल से संपर्क कर इन महिलाओं की दर्दनाक स्थिति की जानकारी साझा की। रानी शक्ति सिंह के अनुसार फिलहाल सभी महिलाएं भारतीय दूतावास के शरण स्थल में रह रही हैं, लेकिन दुखद बात यह है कि उनकी भारत वापसी के लिए उनसे भारी रकम की मांग की जा रही है।
संत सीचेवाल ने कहा कि इनमें से कई महिलाओं के पास अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने तक के साधन नहीं हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से अपील की कि इस गंभीर मानवीय मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेते हुए सभी भारतीय महिलाओं की जल्द सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि झूठे सपने दिखाकर महिलाओं को विदेश भेजने वाले ट्रैवल एजेंटों और मानव तस्करी से जुड़े नैटवर्क के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी भारतीय बेटियों को इस प्रकार के शोषण का शिकार न होना पड़े।

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